सैय्यद जाकीर

जिल्हाप्रतिनिधि वर्धा।  

 

           हिंगणघाट शहर के उपजिल्हा अस्पताल में कई दिनों से लापरवाही चल रही है?ऐसी परिस्थितीओ का अनुभव जनता को आ रहा है!

      उदाहरण से अनेक स्थानों पर पान के थूक का दृश्य दिखाई देता है। जनता को घंटो तक लाइन में खड़े रहना पड़ता है।इसका मुख्य कारण कर्मचारियों की अनुउपस्तिथी है।

     दवाई वितरण विभाग में सिर्फ एक ही महिला कर्मचारी वो भी टेम्पररी है,स्थाई पुरुष कर्मचारी कार्यालय से नदारत रहेता है,मरीजो की जांच,पड़ताल के प्रती डॉ.की रुची दिखावे की है क्या? ऐसा मरीजोंको हर दिन अनुभव आता है।अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवाईयां ज्यादातर बाहर के मेडिकल से लेना पड़ता है।अस्पताल सिर्फ दिखावे का है क्या?यह सवाल जनता के मन को अस्वस्थ कर रहा हैl

      यहां होता कुछ और दिखाते कुछ और है,हकीकत कुछ और है।शहर में इसकी गम्भीर चर्चा है ।डॉ.चाचरकर महत्वपूर्ण चर्चा के लिए भी फोन उठाना उचित नही समझते।बहोत बार उन्हें ऑफिस में एकांत में बैठे मरीजोने देखा है,मरीजो के प्रती फोन नही उठाना यह एक उनके स्वभाव का अहंकार दिखाई देता है।फोन नही उठाने वाली एक गम्भीर बीमारी से जनता भी ग्रस्त है।

    अस्पताल में नियुक्त किये गए है यहाँ के नियुक्त डॉ.भोयर जैसे कई डॉक्टर निजी दवाखाना खोलकर बैठे है,तो डॉ.चाचरकर नागपुर से आना,जाना करते है,इनके ऊपर काम का बोझ बड़ गया है।

    वर्धा जिल्हे सिव्हिल सर्जन जनहित की सुविधा के लिए इसमें दखल देकर वैधकीय अधीक्षक को आदेश देकर लापरवाही आलू कार्य प्रणाली में तिव्रगति से,सुधारना लाकर जनता को सेवा प्रदान करेंगे क्या? होगा ऐसा?या फिर डॉ.चाचरकर को कम बोझ,आरामदायक दवाखाने में स्थानांतर कर दिया जाए। ऐसी जनता की दिली ख्वाईश है,वर्धा सिव्हिल सर्जन जनता को न्याय प्रदान करेंगे क्या ?।

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By Dakhal News Bharat

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